
म्यूचुअल फंड निवेश के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है, लेकिन एक सवाल अक्सर निवेशकों को परेशान करता है—आखिर कितने Mutual Funds में निवेश करना चाहिए? बहुत से निवेशक अलग-अलग अच्छे लगने वाले म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते जाते हैं। किसी को अच्छा रिटर्न देने वाला फंड पसंद आता है, तो किसी को किसी दूसरे फंड का प्रदर्शन बेहतर लगता है। धीरे-धीरे पोर्टफोलियो में 5, 7 या 10 से भी ज्यादा Mutual Funds हो जाते हैं।
लेकिन क्या ज्यादा Mutual Funds रखने से आपका पोर्टफोलियो ज्यादा सुरक्षित और बेहतर हो जाता है? जरूरी नहीं। कई बार बहुत ज्यादा फंड में निवेश करने से आपका पोर्टफोलियो जरूरत से ज्यादा diversified हो जाता है और अलग-अलग फंड के अंदर एक ही कंपनियों में निवेश होने के कारण वास्तविक diversification कम हो जाता है।
Mutual Fund कैसे काम करता है?
सबसे पहले समझते हैं कि Mutual Fund होता क्या है। Mutual Fund एक ऐसा investment vehicle है जिसमें बहुत सारे निवेशकों का पैसा इकट्ठा करके Fund Manager उसे अलग-अलग securities, मुख्य रूप से stocks और bonds में निवेश करता है।
उदाहरण के लिए, अगर आप किसी Equity Mutual Fund में ₹1 लाख निवेश करते हैं, तो Fund Manager इस पैसे को अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकता है। इन कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर आपके Mutual Fund की value बढ़ती या घटती है।
अलग-अलग Mutual Fund Categories का risk और return भी अलग होता है। Large Cap Funds अपेक्षाकृत बड़ी और स्थापित कंपनियों में निवेश करते हैं, जबकि Mid Cap और Small Cap Funds में growth potential के साथ volatility और risk भी अधिक हो सकता है। इसलिए Mutual Fund चुनते समय केवल पिछले returns देखना पर्याप्त नहीं है।
ज्यादा Mutual Funds रखने की गलती
मान लीजिए किसी निवेशक के पास तीन अच्छे Mutual Funds हैं—एक Large Cap Fund, एक Large & Mid Cap Fund और एक Flexi Cap Fund। अगर इन तीनों का उद्देश्य और portfolio एक-दूसरे से बहुत ज्यादा अलग है, तो ये मिलकर एक balanced portfolio बना सकते हैं।
लेकिन अगर निवेशक केवल यह सोचकर नए-नए Mutual Funds जोड़ता रहे कि “यह Fund भी अच्छा है, इसमें भी निवेश कर लेते हैं”, तो कुछ समय बाद portfolio में कई funds हो सकते हैं जिनमें लगभग वही stocks मौजूद हों।
यही कारण है कि Mutual Fund Portfolio Overlapping को समझना बहुत जरूरी है।
Portfolio Overlap क्या होता है?
Portfolio overlap का मतलब है कि आपके दो या दो से ज्यादा Mutual Funds के portfolio में समान stocks मौजूद हैं।
उदाहरण के लिए, अगर आपके दो Equity Mutual Funds में Reliance, HDFC Bank, ICICI Bank, Infosys और TCS जैसे कई समान stocks हैं, तो कागज पर आपके पास दो अलग-अलग Mutual Funds हैं, लेकिन underlying investment काफी हद तक समान हो सकता है।
इस स्थिति में केवल Mutual Funds की संख्या बढ़ने से diversification उतना नहीं बढ़ता जितना निवेशक सोचता है।
Index Funds में यह overlap और भी स्पष्ट होता है। उदाहरण के लिए, दो अलग-अलग Nifty 50 Index Funds लगभग समान stocks और लगभग समान weightage को follow करते हैं, क्योंकि दोनों का benchmark Nifty 50 ही है। इसलिए दो Nifty 50 Index Funds में निवेश करने से आपको वास्तविक diversification का बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलता।
Mutual Fund Performance को Index से Compare करें
Mutual Fund चुनते समय केवल यह देखना कि उसने पिछले 1 या 3 साल में कितना return दिया है, पर्याप्त नहीं है। आपको यह भी देखना चाहिए कि उसने अपने benchmark या relevant index के मुकाबले कैसा प्रदर्शन किया है।
मान लीजिए आपके तीन Mutual Funds ने पिछले 5 वर्षों में क्रमशः 16.2%, 18.4% और 18% annualized return दिया। इनका simple average लगभग 17.5% होगा।
अब अगर इसी अवधि में relevant Index Fund या benchmark ने लगभग 15.5% return दिया है, तो आपके चुने हुए funds ने औसतन benchmark से बेहतर प्रदर्शन किया है।
लेकिन केवल एक अवधि देखकर Fund Manager की skill का फैसला नहीं करना चाहिए। Long-term performance, consistency, expense ratio, risk, portfolio quality और benchmark के मुकाबले performance जैसे factors को भी देखना जरूरी है।
Active Mutual Fund vs Index Fund
यहां एक महत्वपूर्ण सवाल आता है—अगर Index Fund कम cost में market index को track कर सकता है, तो Active Mutual Fund में निवेश क्यों करें?
Index Fund का उद्देश्य benchmark को beat करना नहीं बल्कि उसे track करना होता है। उदाहरण के लिए, Nifty 50 Index Fund का portfolio Nifty 50 Index के आसपास रहता है। इसलिए अलग-अलग Nifty 50 Index Funds के returns में सामान्यतः बहुत बड़ा अंतर नहीं होता। Tracking error और expense ratio के कारण थोड़ा अंतर हो सकता है।
दूसरी तरफ Active Mutual Fund में Fund Manager stocks को चुनने और portfolio में उनकी allocation तय करने की कोशिश करता है ताकि benchmark से बेहतर return generate किया जा सके।
इसलिए Active Fund चुनते समय यह देखना महत्वपूर्ण है कि वह लंबे समय में benchmark को लगातार beat कर पा रहा है या नहीं।
कितने Mutual Funds में निवेश करना चाहिए?
इस सवाल का कोई एक fixed answer नहीं है। कितने Mutual Funds आपके लिए पर्याप्त हैं, यह आपके investment goal, risk tolerance, investment amount, time horizon और portfolio structure पर निर्भर करता है।
हालांकि, केवल अच्छे दिखने वाले हर Mutual Fund में निवेश करते जाना सही strategy नहीं है। यदि आपके पास पहले से एक अच्छा portfolio है, तो नया Fund जोड़ने से पहले यह देखना चाहिए कि वह आपके existing portfolio में क्या नया value add कर रहा है।
अगर नया Fund वही stocks और वही category exposure दे रहा है जो आपके मौजूदा funds में पहले से मौजूद है, तो उसे जोड़ने का फायदा सीमित हो सकता है।
Mutual Fund Portfolio को कैसे Manage करें?
एक अच्छा Mutual Fund portfolio बनाने के लिए सबसे पहले अपना financial goal तय करें। इसके बाद asset allocation और risk profile के अनुसार appropriate Mutual Fund categories चुनें।
इसके बाद प्रत्येक Fund के portfolio को देखें और overlap की जांच करें। अगर कई funds में समान stocks बहुत अधिक हैं, तो portfolio को simplify करने पर विचार किया जा सकता है।
साथ ही, अपने Mutual Funds की performance को उनके relevant benchmark और category peers के साथ समय-समय पर compare करें। यदि कोई fund लंबे समय तक benchmark के आसपास ही return दे रहा है या लगातार underperform कर रहा है, तो उसके portfolio में बने रहने की आवश्यकता पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
निष्कर्ष
Mutual Fund में ज्यादा funds रखना हमेशा बेहतर नहीं होता। एक मजबूत portfolio वह नहीं है जिसमें सबसे ज्यादा Mutual Funds हों, बल्कि वह है जिसमें सही उद्देश्य के लिए सही funds चुने गए हों।
अगर आपके सभी Mutual Funds मिलकर benchmark से बेहतर performance दे रहे हैं, उनका overlap नियंत्रित है और वे आपके financial goals के अनुसार हैं, तो केवल funds की संख्या कम करने के लिए उन्हें हटाने की जरूरत नहीं है।
दूसरी तरफ, अगर आपके portfolio में बहुत सारे funds हैं, उनमें काफी overlap है और उनका overall performance benchmark के बराबर या उससे कम है, तो portfolio को simplify करने पर विचार किया जा सकता है।
इसलिए अगली बार कोई नया Mutual Fund देखकर तुरंत निवेश करने के बजाय खुद से तीन सवाल पूछें—क्या इसकी जरूरत है? क्या यह मेरे existing portfolio में कुछ नया जोड़ता है? और क्या इसका long-term performance इसके benchmark के मुकाबले अच्छा रहा है?
यही approach आपको एक simple, diversified और efficient Mutual Fund Portfolio बनाने में मदद कर सकती है।
Retail Investors Paisa Kyu Haarte Hain? Fear, Greed aur FOMO Ki Psychology Samajhiye
for stock analysis go to https://www.screener.in/
